मैंने फिर कुछ और नहीं देखा तेरी तस्वीर के बाद
साँसे थम सी गई दर्द-ए-तन्हाई की तासीर के बाद
सच कहते हैं सौदा-ई मुहब्बत में नींदे हराम हैं यार
ये आँखे ख़्वाब क्या देखे माशूक़ की ताबीर के बाद
नसीब-ए-हिज़्र मुक़ाबिल हुआ तों ग़ैज़ हुआ उससें
किसी सें नहीं बनी फिर कातिब-ए-तकदीर के बाद
उसके कदम सर-माथे पऱ एक वो ही मेरा ख़ुदाया
कहीं सज़दा नहीं किया उस मुहब्बती पीर के बाद
रोग लगा महबूब का सब नीम-हक़ीम बेकार हुए
मुझकों दवा न लगी मुहब्बत की अक्सीर के बाद
तेरे दर सिवा किधर जाए सो दर पर सर पटक रहे
कृष्णा क़ोई दर न बचा मुहब्बत की जंजीर के बाद
-कृष्णा शर्मा
सौदा-ई = मजनू जैसे आशिक़, गैज़ = गुस्सा, मुकाबिल =रूबरू
नसीब-ए-हिज़्र = नसीब में लिखी तन्हाई, अक्सीर = अचूक दवा
कातिब-ए-तकदीर = नसीब लिखने वाला भगवान


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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