Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

मैं कब सर्वश्रेष्ठ रचनाकार बनूंगी - सुप्रिया साहू

दिल में हजार तूफानों की कश्तियां बह रही,
मेरे ही उम्र में कई हस्तियां भी मर रही,
अपनों से लड़ के लड़ाइयां कितनों की नैया डूब रही,
संघर्ष की इस पीड़ा में मैं कब जीत का हार बनूंगी,
मैं कब सर्वश्रेष्ठ रचनाकार बनूंगी....।।1

इसी मिट्टी में जन्म लेकर इसी मिट्टी में मिल जाऊंगी,
करके कुछ अच्छे कर्म मैं दुनिया को दिखलाऊंगी,
जो बहे रगों में सबके ऐसी खुशबू बन महकाऊंगी,
पत्थर की लकीरों को तोड़ कर मैं पार करूंगी,
मैं देश की शिक्षा हर बार बनूंगी,
मैं कब सर्वश्रेष्ठ रचनाकार बनूंगी....।।2

दीपक की लौ जलाकर,
हर दिशा में रोशनी बिखेरूंगी,
छाया ना रहे अंधकार ऐसी मृदु ध्वनि छेडूंगी,
सुनाऊंगी लोगों को नवीन गाथाएं,
माता-पिता के आशीर्वाद की धाराएं,
मैं समर्पण का प्रतीक बनूंगी,
मैं कब सर्वश्रेष्ठ रचनाकार बनूंगी....।।3

- सुप्रिया साहू




समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (6)

+

Lekhram Yadav said

आप एक दिन अवश्य सर्वश्रेष्ठ कलाकार बनेंगी बस लिखते रहो और धैर्य से काम लो, कोशिश करते रहो, कोशिशें ही सदैव कामयाबी का ताज सिर पर बांधती है। बहुत खूबसूरत और लाजवाब रचना आपको सादर नमस्कार।

उपदेश कुमार शाक्यावार said

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..आपको प्रणाम

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह! मन में इतनी बड़ी अभिलाषा।हमारे देश के वैज्ञानिक राष्ट्रपति स्व कलाम सर कहते थे सपने जरूर देखना चाहिए क्योंकि सपने नहीं देखोगे तो संघर्ष कैसे करोगे। आपकी रचना में संघर्ष, तड़प, स्वयं को साबित करने की तमन्ना और दूसरों के लिए समर्पण भाव समाहित है। सुंदर मनोभाव। सादर नमस्कार।।

सरिता पाठक said

अति सुन्दर रचना, सुप्रिया जी आप एक मशहूर रचनाकार अवश्य बनोगी, मेरी नज़र मे तो अभी एक मशहूर रचनाकार हैँ, आपने मेरी रचना अपना घर नहीं पढ़ी पढ़िएगा आपको अच्छी लगेगी, आपको स्नेह युक्त प्रणाम 🙏

कृष्णा शर्मा said

आप कभी किसी सें कमत्तर थी ही नहीं...
आप बहुत खूबसूरत लिखती हैं इसमें ख़ुद पऱ शक़ करने की जरूरत नहीं हैं आपको...
कभी किसी सें ख़ुद को कमत्तर ना समझें...
कभी ख़ुद को हीन भावना सें ग्रसित न होने दे..
आप बहुत खूबसूरत हैं और बहुत खूबसूरत लिखती हैं...
आप ऐसे ही खूबसूरत लिखती रहे और ख़ुद को कभी ख़ुद को कमत्तर ना समझें...

ममता तिवारी said

वाह सुप्रिया जी सर्वश्रेष्ठ रचना बहुत सुंदर बहुत खूब लाजवाब लाजवाब 🙏🙏👌👌

कविताएं - शायरी - ग़ज़ल श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन