मैं हजारीबाग झील का दीवाना
उसकी आंखों में खो गया मस्ताना
हर सुबह की खामोशी में उसकी बातें
मेरे दिल को देती है प्यार का बहाना
पानी पर तैरती सुनहरी धूप
जैसे कोई लिख रहा हो अफ़साना
हवा छुकर कहती है धीरे से
जैसे कोई गीत हो पुराना
शाम ढले जब रंग घुल जाते हैं
लहरों में छुप जाता है जमाना
बैठ किनारे सोचता रहता हूं
कितना गहरा है इसका तराना
चांद उतर आता है पानी में
तारों का लगता है आशियाना
दिल कहता है हर पल मुझसे
यहीं रुक जा तू ओ परवाना
मैं सौरव(100₹v) हजारीबाग झील का दीवाना
उसकी रूह में बस गया मस्ताना


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







