मैं नहीं कहता तो करता क्या,
दर्द में रहकर दर्द करता क्या,
ज़ुबाँ की जीभ पर जहर भरता क्या,
जो सोच नहीं पाया वो जबरन करता क्या,
आदमी सुकून में न मारता तो मरता क्या,
भरा खाली खाना पाना खोना सब असर करता क्या,
तेरे दर पर दर्द नहीं दिखता तो फिर तू मरहम करता क्या,
कुछ नहीं मैं क्या कहूँ सुनने पर कोई करता क्या। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







