मैं कौन है?
मैं जरूरी है, क्योंकि वो खोज करता है।
मैं है या नहीं, यही होना ना होना का उत्तर है।
मैं जान लेने पर भी अस्तित्व नहीं जाना जा सकता।
हमारे पास जो समय है,
वो हमारे जीवन को न्याय नहीं दे सकता।
मैं कौन हूँ?,
का उत्तर सभी नहीं जानना चाहते,
वह अपनी जिंदगी से प्रेम करते हैं।
जिंदगी ही वो प्रेम है,
जो मैं को खोज देता है प्रश्नों की,
जहाँ मनुष्य है और नहीं, जैसे तर्कों से,
कुछ भौतिकता से,
कुछ मानसिकता से,
कुछ अनुभव से,
कुछ सम्भावनाओं का जोखिम लेकर,
रहस्यों को खोजता है,
जहाँ कभी उसे खुद का आभास होता है,
कि अकेला होना ही मैं है,
जो इस ईश्वरी उदासीनता से बचना चाहता है,
ईश्वर उदासीनता का सत्य है।
सत्य को बिना सत्य के खोजना, झूठ पैदा करता है।
- ललितदाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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