क्यों पुकारा हमको
गर चांद तारों की चाह ना थी, तो क्यों पुकारा हमको
खुश थे अपनी दुनियां में हम क्यों दिया सहारा हमको
कोई तो होगी ख्वाहिश तुम्हारी इन खोई हुई निगाहों में
क्या कुसूर था इस दिल का, क्यूं बनाया अवारा हमको
हर चाहत तो कोई पूरा कर नहीं पाया है इस जमाने में
चांद तारे लाने की ख्वाहिश ने बनाया है बेचारा हमको
ये ख्वाहिश भी करता पूरी अगर मैं होता जिन्न या परी
मगर मैं इन्सान हूं सीधा सादा ये भी नहीं गंवारा तुमको
अपनी खुशी के लिए किसी के दिल से न खेला करो तुम
अगर कुछ हो गया तुमको तो कहां है ये गंवारा हमको
गर हमारी जगह पर अब कोई और यहां पे होता यादव
वो जान दे देता हंस कर जिस तरह तूने पुकारा हमको
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







