कोई था
जो मुझे बहुत चाहता था
मुझे वो अपनी
दुनिया मानता था
बोलने से पहले
मेरी हर एक बात जानता था
खामोशी मे भी
मेरी आवाज सुनता था
उसे चाहत थी
मेरी खुशीओ की जैसे
मुझे वो इनसान नही
अपना खुदा मानता था
हसता था
मेरी हर हंसी पर
जैसे मुझ मे ही
अपनी दुनियां ढुंढता था
चंचल था
एक जगह ठहेरता नही था
अपनी बात से
कभी भी मुकरता नही था
करता था
वादा साथ जिने का
साथ मरने का
पर एक दिन वादा जो टुटा था
उसकी आँंखो मे
हलका सा दर्द दिखा था
उस दिन दिल मेरा
बडे दर्द से गुजरा था
कर गया था
अलबिदा मुझे वो
ना चाहकर भी
वो चाँद सितारो मे बैठा था


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







