राह चलत जो छेड़े तुमको,भर भर खाए गाली,
खुद छिड़ने को बैठी रहती,अरी!कैसी हो नखराली
किससे प्यार करोगी....
किसके लिए मरोगी..….
फूल सी कोमल सूरत मासूम, लगती हो मनभावन,
कभी गुस्से में लगती हो,डायन से बड़ी डरावन
किससे प्यार करोगी...
किसके लिए मरोगी....
गांव गली के छोकरे, तुमसे मिलने को तरसे,
देख तेरी आंखों का तेवर, सहमें रहते डर से
किससे प्यार करोगी...
किसके लिए मरोगी....
सब लोगों की बनी चहेती, चुलबुली चुलबुली चंचल,
तनिक सी गुस्सा भर देती है, सबके मन में हलचल
किससे प्यार करोगी....
किसके लिए मरोगी.....
जितना गुस्सा करती हो, उतनी ही लगती हो प्यारी,
जरा बताओ बनोगी किसकी, दिल की राजकुमारी
किससे प्यार करोगी....
किसके लिए मरोगी......
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







