किसलिए हैं हम जो खुद से सवाल करते हैं
कभी दिमाग़ कभी ये दिल लाजवाब करते हैं
सच में वही लोग महसूस करते हैं खुदा को
वतन पे जां अपनी हँसके क़ुरबान करते हैं
कोई भी दामन पर दाग उसके लगा नहीं है
दुनिया वाले उसे बेकार में बदनाम करते हैं
किसी की बात का क्या भरोसा किया जाये
अमन की वकालत कर खुद कोहराम करते हैं
हमने अपना घर महल जैसा सजाया है दास
हाँ माँ बाप अपने टूटे घर में निवास करते हैं! !


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







