किस भ्रम में डूबे हैं हम
किसी भ्रम में न रहना तुम
न वो चेहरे की सुन्दरता देखेगा
न ही तुम्हारी कुरूपता देखेगा
न कोई भाषा का ज्ञान माँगेगा
न तुम्हारा कद-काठ भाँपेगा
न ही धन-धान्य जाँचेगा
न तुमसे तुम्हारा सांसारिक पद ही पूछेगा
वो तो तुम्हारे मन की सुन्दरता देखेगा
स्वभाव में सरलता परखेगा
शब्दों में सभ्यता चाहेगा
वाणी की मधुरता सुनेगा
तुम्हारे हर कर्म की राह से ही तुम्हें जानेगा
भ्रम रखना हो तो इस बात का रखना कि वो हर पल हर क्षण तुमको परखेगा ..
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







