खुदाई झूठी लगे तों कोई कैसे इबादत करे
दुआ के धागे टूट गए कोई कैसे मन्नत करे
सच क्या बोल दिया हम पागल लगने लगे
हर शख्श रूठा हैं उनक़ो कैसे सहमत करे
उदास चेहरा रोती हुई आँखे मरने की बाते
कैसे कोई इस हाल में मुझसें मुहब्बत करे
ना वक़्त अपना रहा ना हालात अपने रहे
तू ही बता हम किस-किस क़ो तौहमत करे
तेरी यादों के ज़ख्म मुझे पल-पल तड़पाते हैं
तू ही बता ऐसे में पीड़ा में कैसे रियायत करे
कृष्णा ख़ुद सें थक चुकी मर चुकी कब की
कोई उम्मीद-ऐ-आस नहीं क्या हसरत करे...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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