"खुद दर्द खुदा है"
किसी को दर्द की दवा ना देना,
इतना मुस्कुरा कर ना कहना,
कि फिर से वो तुम्हें याद कर बैठे,
खुद को फिर से कोई दर्द दे बैठे,
फिर से तुम्हें बुलाने को,
बात मिलना साथ हँसी घूमना ठीक है,
पर फिर कहीं किस्सा किस्सा ज़माना ना याद कर बैठे,
सम्भाल लो है दर्द कहीं,
उस दर्द को वहीं रहने दो,
जितना भी दर्द है एक दिन खुद ही मर जाएगा,
नहीं जिंदा रहते कोई दवा के सहारे,
ग़म हवा शिकवा गिला,
और कोई यही सिलसिला दे जाएगा,
ये जानो कि ये दर्द वही है,
जैसे खुदा की बात,
जैसे खुद की बात,
पर पता ही नहीं कोई खबर ही नहीं है,
जितना इसको ढूँढता हूँ,
या तो खो जाता हूँ और जिंदगी देखता हूं,
और जिंदगी देखता हूं तो खो जाता हूँ,
ये ऐसा क्या करना जानता है,
कि कोई ख्याल इसकी हकीकत से,
कि कोई हकीकत इसके ख्यालों से नहीं मिलती,
ये खुद और ये खुदा,
दोनों हमारी ख़बर को बेख़बर कर देते हैं,
दोनों इतने पास होंगे कि दोनों ही खास होंगे,
बस इतना जान ए जानकारी ने कहा कि,
जो साँस मैं लेता हूँ वो खुदा की दी होगी,
जो साँस मैं छोड़ देता हूँ वो खुद की दी होगी,
हो सकता है कि ये खुद और खुदा की बातचीत होगी,
और मैं केवल उनका मिलन स्थान हूँ,
यहाँ जिंदा रहने पर शायद दोनों का मिलना होगा,
यहाँ मरने वाला शायद दोनों का पसंदीदा होगा।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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