अब नींद भी कम है, रातों में वो खामोशियां भी नहीं..
मंज़िलें दूर हैं, और अंधेरी राहों में वो रोशनियां भी नहीं..।
चमन में गुल भी आख़िर, कब तक बेवज़ह मुस्कुराता..
बाग़बां की तवज्जो नहीं, बहारों की वो मेहरबानियां भी नहीं..।
अब ये किस मोड़ पर है, मुहब्बत का कारवां मेरा..
निगाहों में इंतज़ार नहीं, और दिलों में वो नजदीकियां भी नहीं..।
मैं फ़िर से लौट तो आया, दिल के इसरार पर मगर..
वो हमनवां नहीं, वो शज़र नहीं, वो वाक़िफ-ए- गालियां भी नहीं..।
वक्त रहते वक्त पर छोड़ दिया था, अफ़साना हमने..
अब हमें उम्मीद नहीं, और उनको गलतफहमियां भी नहीं..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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