कविता : प्यार का रस....
तुम्हारी उमर
भी मस्त है
तुम्हारा शरीर भी
जबरदस्त है
मैं भी इतना कहां
नालायक हूं
देखो मुझे तुम्हारे
ही लायक हूं
पसंद हूं तो मेरे
पास में आओ
मेरे से नजदीकियां
तुम बढ़ाओ
अगर नहीं तो इधर
उधर देख लो
प्यार करने की उमर है प्यार
का रस चख लो
प्यार करने की उमर है प्यार
का रस चख लो.......
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







