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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

क्षणभंगुर

नश्वर है यह देह हमारी, अमर नहीं अभिमान यहाँ,
क्षणभंगुर हर श्वास जगत की, टिकता कब सम्मान यहाँ।

मुट्ठी भर सपनों के पीछे, जीवन सारा बीत गया,
मोह-मरीचिका के वन में ही, सत्य कहीं फिर रीत गया।

कलियाँ हँसकर खिलती देखो, संध्या तक मुरझा जातीं,
जन्म-मरण के शाश्वत क्रम में, ऋतुएँ भी झुक-झुक गातीं।

महलों वाले, वनवासी भी, एक दिवस मिट जाते हैं,
कालचक्र के सम्मुख आकर, सब मस्तक झुक जाते हैं।

धन-दौलत का मान निरर्थक, पद की कैसी ऊँचाई?
संग न जाता रज-कण भर भी, रहती केवल सच्चाई।

मधुर वचन की अमिट सुगंधें, युगों-युगों तक महकेंगी,
करुणा, सेवा, सत्य-दीपिका, तम की सीमा लाँघेंगी।

दर्प धरा का धूल बनेगा, यश भी होगा क्षीण कभी,
केवल शुभ कर्मों की गाथा, गूँजेगी अविराम तभी।

नदियाँ सागर में मिल जातीं, पंछी लौट गगन के पार,
जीवन भी इक यात्रा भर है, मत समझो इसे अपार।

अंत समय जब दीप बुझेगा, साथ न कोई आएगा,
अपने कर्मों का ही लेखा, जीवन-पथ दिखलाएगा।

इस क्षणभंगुर जग के भीतर, प्रेम अमर उपहार बने,
मानवता की पावन सरिता, हर उर का श्रृंगार बने।

जीवन यदि है ओस-बिंदु-सा, क्यों फिर इतना अहंकार?
बाँटो स्नेह, क्षमा और ममता, यही मनुज का है श्रृंगार।

नश्वर तन है, नश्वर जग है, शाश्वत केवल कर्म महान,
जो जनहित में जीवन जीता, वही बनता है अमर विधान।




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (2)

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आदर्श भूषण said

वाह! आपने जीवन की नश्वरता, कर्म की शाश्वत महिमा और मानवता के सनातन मूल्यों को अत्यंत गंभीर, दार्शनिक एवं काव्यमय शैली में अभिव्यक्त किया है। आपकी रचना का प्रत्येक पद आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है और यह संदेश देता है कि नश्वर संसार में केवल श्रेष्ठ कर्म, प्रेम और करुणा ही मनुष्य को वास्तविक अमरत्व प्रदान करते हैं।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

अतिसुंदर, जीवन की यथार्थता का काव्यात्मक अभिव्यक्ति,तन को एक दिन मिट्टी में मिल जाना है,पूण्य कर्मों की सुगंध ही संसार में रह जाती है।सहज भाषा में गंभीर चित्रांकन। वाह क्या बात है 👌👌🙏🙏🙏

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