ये जो तू दूर खड़ा हैं इतना पास आ जाए तों क्या होगा
एक नज़र क़ो तरस जाते हैं गले लग जाए तों क्या होगा
हर मंदिर की चौखट पऱ माथा रगड़ा हैं तुझक़ो पाने क़ो
नेमत हों उसकी तू ग़र जिंदगी में आजाए तों क्या होगा
कसम ख़ुदा की बड़ा तड़पे हैं मेरी जान तेरे दीदार क़ो
तू अचानक सें अग़र मेरे रूबरू आजाए तों क्या होगा
ख़ुद क़ो तेरे कदमों पऱ वार दूँ एक दफ़ा हुकुम तों कर
धूल हूँ तेरे कदमों की तू माथे सें लगा ले तों क्या होगा
एक रत्ती भर भी नहीं पाया तुझकों फिर भी गुमान में हैं
तू अग़र ज़रा सा भी मेरे हिस्से में आजाए तों क्या होगा
कृष्णा क़ो तमाम उम्र इंतजार रहा तेरे आने का जानाँ
कहीं यूँ न हों तू न आए दम निकल जाए तों क्या होगा...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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