जन्म होता है,
तो माँ का घर छूटता है,
बच्चा बड़ा होता है,
तो बचपन छूटता है,
खुद चलना सीखता है,
तो पिता का हाथ छूटता है,
खाना खाने लगता है,
तो माँ का आँचल छूटता है,
जमीन पर बैठने लगता है,
तो किसी ना किसी की हथेली छूटती है,
भाषा सीख लेता है,
बोल लेता है,
तो प्रेम की भाषा,
सच्ची बोली छूटती है,
नाम मिलता है,
तो प्रिय अलग अलग नाम छूटते हैं,
दोस्त मिलते हैं,
तो भाई बहन छूटते हैं,
स्कूल मिलता है,
तो घर छूटता है,
गुरु पढ़ाता है तो,
प्रकृति की भाषा छूटती है,
खेल खेलते हैं,
तो सारा जहां छूटता है,
प्रेम मिलता है,
तो स्कूल छूटता है,
प्रेमी मिलता है,
तो ख्वाब छूटते है,
साथ मिलता है,
तो हकीकत छूटती है,
लक्ष्य मिलता है,
तो निर्भरता छूटती है,
ज्ञान मिलता है,
तो लक्ष्य में मोह छूटता है,
जीवन साथी मिलता है,
तो परिवार से संपर्क छूटता है,
नया घर रिश्ता मिलता है तो,
दोस्त छूटते हैं,
कमियां देखते हैं,
तो हर साथ छूटता है,
संतुलन लाते हैं,
तो दिखावा छूटता है,
निभाना आ जाता है,
तो करना होना छूटता है,
अपना ही बच्चा होता है,
तो खुद पर से स्पर्श छूटता है,
उसकी देखभाल करते हैं,
तो अंदर का अथाह ज्ञान छूटता है,
अनुभव मिलता है,
तो दोषारोपण छूटता है,
संगीत मिलता है,
तो मुश्किलों का एहसास छूटता है,
बच्चा बड़ा होता है तो,
पैसे का साधनों का मोह छूटता है,
विवेकी कल्याण करते हैं,
तो अंग अंग का,
पसीना छूटता है,
प्रकृति का साथ निभाते हैं,
तो खुद का रंग छूटता है,
मुश्किल को आसान करते हैं,
तो हर हिस्से से अधिकार छूटता है,
खुद को जानने लगते हैं,
तो हर एक आधार छूटता है,
संसार के होने को छूने लगते हैं,
तो खुद ना होने का भार छूटता है,
आगे पीछे रहते हैं,
तो आज छूटता है,
विचार करते हैं,
तो एक विचार छूटता है,
उम्र बढ़ती जाती हैं,
तो हर कर्म से हाथ छूटता है,
शरीर अनुभवी पर उम्रदराज है,
तो आंतरिक शक्ति का व्यवहार छूटता है,
अंततः कुछ नहीं मिलता,
पर मृत्यु मिलती है,
अंततः कुछ नहीं होता,
पर मृत्यु होती है,
अंततः हाथ में कुछ नहीं है,
पर मृत्यु के हाथ में है,
अंततः मृत्यु होती हैं,
हम नहीं होते हैं,
फिर भी काल इस पक्ष में,
सवाल है,
नींद का कारण,
सपने,
जीवन,
मैं,
ईश्वर,
प्रेम,
स्वभाव,
कर्म,
लक्ष्य,
साथी,
ये सब शब्द है,
और भी शब्द है,
या इनका,
इनकी तरह के,
सवालों कोई,
जवाब या अस्तित्व,
वो है तो मतलब हमारे पक्ष में होने में नहीं आता,
और नहीं है तो हम उसके पक्ष में,
वैसे भी मृत्यु के बाद होते ही नहीं,
उसका पक्ष मजबूत है,
हमारा नहीं,
क्यूंकि हमें मिलता है,
क्यूँकि छूटता है,
उसके पक्ष में हाँ और ना सब होना है,
हमारे पक्ष में नहीं होना ही होना है,
हम करने वाले,
वो होने वाला। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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