मैं नहीं कह रहा हूं कि सीमित रहो, रुकना नदी, हवा के लिए भी घातक है तो तुम तो खोखले हो जाओगे, यह बात समझो की निरंतरता में रहना और एक कार्य के लिए निरंतरता दिखाना, उसी प्रवाह में रहना और बहना कितना जरूरी है तुम यह समझो कि रोशनी जिस सूरज और तारों से आती है वो उसी निरंतरता को पकड़े हुए है और जब वो हमारी आँखों से ओझल होती है तो हमने उसकी निरंतरता और उससे प्रेरणा पाकर कृत्रिम प्रकाश को बनाया है वही एक ही काम जो तारें, सूरज और चांद करता है प्रकाश का संचालन उसी को जारी रखने का एक असफल से सफल प्रयास हमने भी किया, यानी कि अगर वो यह काम सालों से ना करते; उस निरंतरता और एक ही काम को नहीं करते तो हम उस काम से प्रेरणा नहीं ले पाते। जरुरी यही है कि हम भी एक कार्य को चुनें और उस काम को निरंतरता में करते रहें। एक जरूरी बात है कि हमें एक विश्वास की भी जरूरत होती है इस निरंतरता यानी हमारे पास आधार के साथ एक ढ़ाल का होना जरूरी है क्योंकि लंबा सफर उबाऊ ना लगे, पर विश्वास किस पर हो, मेरा विश्वास तो वो कार्य ही हैं जिसे निरंतरता से मैं कर रहा हूं। यही कार्य हमारी ढ़ाल है और यही आधार भी है लेकिन दो चीजों पर और ध्यान दो कि जो कार्य कर रहा है कर्ता और जो रास्ता है वो दोनों से सम्बन्ध स्थापित करना जरुरी है। यानी आप और आपका रास्ता कैसा हो ये आपके भीतर को समझना जरूरी है।आप जैसा उससे रिलेशन स्थापित करेंगे वैसे ही वो रास्ता आपको जरूरत की चीजें देगा। आपकी मंजिल तो सिर्फ एक तन्हाई है, वो तो एक बिंदु की तरह है बाकी कुछ नहीं है, जिस जगह आप अपने दोनों पैर रख सकते हो और उबासी ले सकते हो, आपको जो मिला वो स्वयं, वो कार्य और उस रास्ते में जब आप निरंतरता दिखाते हुए चलते हो कार्य करते हो वो एक जगह जहां थोड़ी देर के लिए इकट्ठा होता है उसे मंजिल कह दो या सागर जहां बूंदें अपनी पूर्णता में आ गई फिर अधूरी हो जाएगी। ।
हम उनसे मोहब्बत करते, देखते देखते खो ना जाए,
जब तुम्हें कोई चाहे, जब दिल के धागे की उलझन में,
जब तुम्हें कोई चाहे,
और दिल के धागे, उलझन में...
आईने में अजनबी सा,
देखता हूँ खुद को फिर मैं
उनके दिल पे क्या गुजरे, जब वो हमारी आंखों से यूं गुजरे और ना ठहरे,
अगर दर्द ना होता, तो कमाल सफर होता, अगर ख्वाब ना होते तो, मिलकर थाम लेते, साथ तुम्हारा, अगर........,
अगर तुम्हें मेरी बात पर हक़ मिले तो, मेरी बात को समझो,
अगर ये ख्याल हो तो, कमाल समझो।
मेरे चेहरे की तरफ,
सारा जग देख रहा, सवाल पर सवाल है,
कितना बवाल है,
मेरी जिन्दगी मैंने ना देखी,
ये जग का क्या हिसाब,
ये जग का क्या हिसाब है,
ये रिश्ता ही खराब है।।
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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