कभी इधर तो मैं कभी उधर से देखता रहा
तुम्हारी फोटो को मैं चश्म-तर से देखता रहा
मैं रात जागता रहा यूं ही तुम्हारी याद में
तुम्हारी राह मैं तो फिर सहर से देखता रहा
सभी अलग हैं और बस यही गुनाह है मेरा
कि सबको क्यों मैं एक ही नज़र से देखता रहा
न भूला है वो पल मुझे जहां खड़े हुए कभी
गुज़रते मैं तुझे यूं दिल-जिगर से देखता रहा
मैं मर गया नज़र उसी पे जम गई है पर मेरी
कभी जमीं उसे कभी क़मर से देखता रहा।
(क़मर: चाँद )
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







