के मालूम होता तो रस्ते में ही रह जाते,
के ये मंज़िल भी किसी रास्ते को शुरू करती है,
के इस बहाने आज किनारे पर खड़े नहीं रहते।
के इतनी दूर आकर भी उनसे मिलने से दूर हो जाए।
- ललित दाधीच

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
के मालूम होता तो रस्ते में ही रह जाते,
के ये मंज़िल भी किसी रास्ते को शुरू करती है,
के इस बहाने आज किनारे पर खड़े नहीं रहते।
के इतनी दूर आकर भी उनसे मिलने से दूर हो जाए।
- ललित दाधीच
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