(बाल कविता)
जो भी खाता सदा चना
___________________
जो भी खाता सदा चना ।
रहता है वह स्वस्थ बना ।।
दाल चने की भी बन जाती
बहुत दलभरी इसकी भाती
चक्की में इसको पिसवाओ
असली बेसन फौरन पाओ
कढ़ी पकौड़ी खूब बना लो
मीठा हलवा जमकर खा लो
स्वाद भरे लड्डू बन जाते
बच्चे बूढ़े सबको भाते
साग चने का खाने से न
कोई करता कभी मना ।
जो भी खाता सदा चना ।
रहता है वह स्वस्थ बना ।।
चना भिगो कर जो भी खाता
घोड़े जैसी ताकत पाता
चने से बूंदी भी बन जाती
सबके मन को है ललचाती
इससे बनता लड्डू मीठा
और रायता बनता तीखा
शक्कर के रस में तुम डालो
बूंदी की नुक्ती बनवा लो
बर्फी खाने से शरीर में
आती फुर्ती कई गुना ।
जो भी खाता सदा चना ।
रहता है वह स्वस्थ बना ।।
बेसनौटी रोटी जो खाता
पोषक तत्व बहुत से पाता
व्यंजन रोज़ चने का खाओ
खूब विटामिन मिनरल पाओ।
घुघरी घर में रोज बनाना
सेतुवा इसका नियमित खाना
कमी खून की हो न पाए
चना हमेशा जो अपनाए
रोग दूर हो जाएंगे बस
बीमारी होगी सपना ।
जो भी खाता सदा चना ।
रहता है वह स्वस्थ बना ।।
&
~राम नरेश 'उज्ज्वल'
उज्ज्वल सदन
मुंशी खेड़ा,(अपोजिट एस-169
ट्रांसपोर्ट नगर), एल.डी.ए. कालोनी,
लखनऊ-226012
मो: 07071793707
ईमेल : ujjwal226009@gmail.com


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







