"जिंदगी तेरे रंग हजार"
जिंदगी प्रतियोगिता नहीं,
हर पल तुलना करते रहें एक दूजे से,
सबके अपनें अपने गुण,
कोई जमीन से फसल उगाए ।
कोई समुद्र से मोती ढूंढे,
कोई आसमान की खोज खबर ले,
सब अपनी जगह महत्वपूर्ण ।
जिंदगी जंग नहीं,
लड़ते रहें बात बात पर,
कभी मौन रहकर लड़ाई को टालें,
कभी हंस कर ।
जिंदगी श्रेष्ठ नहीं,
सब अच्छा ही अच्छा मिले,
जो मिला है उसी को अच्छा मानिए ।
जिंदगी खुशियों का बाजार नहीं,
जहां खुशियां ही खुशियां हों,
यहां धोखा दुःख सब मिलता है,
सहने की ताकत होनी चाहिए,
सब आसान है।
यहां रोओगे तो जिंदगी दुःखो का सागर है,
यहां हंसोगे तो खुशियां ही खुशियां
जैसा मन वैसा जीवन ।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार )


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







