जिंदगी को किसी का शौक नहीं,
पर जिंदगी में शौक सब रखते हैं,,
दिल तसव्वुर से जागा है,
सोचता हूं जान जल्दी चली जाए।
तारीफ उनकी करूं या तारीख से तन्हां रहूं, बेतहाशा लूट चुका हूं,
पनाह लेना अब मुकम्मल नहीं,,
एक बूंद को फेंका हूं, उनके दिल की ओर, सोचता हूं बारिश में अपना इश्क़ भर दूं, तसल्ली ये हो जाएगी कि वो ,
मुझे ना भी चाहे ना भी मिले,
पर सबमें मेरी मोहब्बत रहेगी,
चाहे वो किसी के साथ भी रहेगी,
मेरी तन्हाई उनमें भर जाएगी,
मैं अकेला तो अकेलों से नहीं मिलूंगा,
बस बीच में मालिक रहनुमा का मोह ना आ जाए,
तो सारी कहीं शर्तें उनकी न रह जाए,
इश्क़ को लगता है आदत और रोज़ाना नैसर्गिक तीरों से भेजना होगा,
ताकि मालिक ना ख़बर हो कि कहीं इसने भी इश्क़ किया है,
कम से कम सबकी जुबानों में जन्नत रहेगी, मेरी आशिकी उनके साथ सबकी हुईं मुलाकात में महफूज़ रहेगी,
इश्क़ के कर्म में भी पाकीजा बढ़ती रहेगी।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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