जूठा जाम है ये इश्क़
जूठा जाम है ये इश्क़, किसे गले लगा के आया
चाँदनी में पीया इसे, सुबहो तक फिर से आया
आँखों से वो डाल रहे नशा, चढ़कर होंठों पे आया
लड़खड़ाया देख उन्हें, फिर नशा क्यों संभल के आया
बैठी थी वो ओझल में, सरसर झलकों ने मन को बहुत सताया
काजल डालें वो आँखों में, मेरे दिल में क्यों अंधेरा छाया
जला रहा हूँ जाम को, क्यों वो नशे को डुबो रही है
सता रहा हूँ बाहों को, क्यों वो खुद के पास रह रही है
जान नशे की दिवाली है, आँखों में तू क्यों सज रही है
बहुत मेरा दिल तेरा चेहरा बनकर आया
छोड़ दिया मैंने गिलास को, नशा तेरी रूह से आया
टूटा अक्स, रूठी रूह, दिल में तू
दिल फ़ना है दर्द पे, दर्द फ़ना का जाम लगाया
फ़ना नशा का गिलास बनकर मेरे सीने में उतरने आया
जूठा जाम है ये इश्क़, किसे गले लगा के आया।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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