खुशी ही सब को अच्छी लगती
बेमौसम का गम सहा नही जाता।
बचपन वाली मासूमियत आ जाए
दर्पण से झुर्रियों को पढ़ा नही जाता।।
मूँद के पलकें बदल रही करवटे
सिलवटो से भार सहा नही जाता।
खुशी परिंदा रहता था अक्सर
अब उड़कर कहीं चला नही जाता।।
दर्द की महफ़िल सजी है दिल में
असमंजस में डुबा महबूब नही बुलाता।
बात-चीत करके हर लेता था गम
हँसता होगा पर मेरे गम नही चुराता।।
इश्क की बाजी पलट रही 'उपदेश'
यादो की लज्जत में मजा नही आता।।
सच में अपनी जीत मुकद्दर होती
फिर चढ़ती उम्र में सजा नही आता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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