आजादी केवल पर्व नहीं, यह वीरों की कुर्बानी है,
माटी के कण-कण में बसती, भारत की अमर कहानी है।
तिरंगा यूँ ही नहीं लहराता, लाखों ने प्राण गंवाए हैं,
तभी तो आज खुले गगन में, हमने सपने सजाए हैं।
जिस धरती ने वीरों को जन्म दिया,
जिसने आज़ादी का दीपक, फिर से जला दिया।
भगत सिंह, आज़ाद, बिस्मिल की कुर्बानी,
सुभाष की हुंकार और झाँसी की रानी।
गांधी जी का सत्य, पटेल जी का स्वाभिमान,
असंख्य वीरों से मिली आज़ादी की पहचान।
नमन उन महापुरुषों को, नमन उन बलिदानों को,
नमन देश पर मिट जाने वाले वीर जवानों को।
उनके त्याग से मिली हमें आज़ादी की उड़ान,
उनके सपनों का भारत है, अपना हिंदुस्तान।
आज मयंक के मन से निकली, वतन के नाम ये वाणी,
भारत माँ की जय-जय बोले, हर साँस हमारी कहानी।
तिरंगा ऊँचा रहे सदा, यही रहे अरमान,
जनम-जनम तक गूँजता रहे—मेरा प्यारा हिंदुस्तान।
रचनाकार :- डॉ. मयंकेश कुमार दुबे
एम.ए. इतिहास(गोल्ड मेडलिस्ट )
औलेंडा,आगरा (उत्तर-प्रदेश)
मो. :-8630291252


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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