इतना भी हकीकत में नहीं जीना कि जिंदगी छूट जाये,
तुम्हें इतना भी नहीं देखना कि इस बहाने सारा शहर छूट जाये,
हाँ इतना भी हाँ मत करो कि ना का सारा सब्र टूट जाये, और ये बातों की आवाजाही ये कहानियों का कहना सुनना छूट जाये,
इतनी भी अजनबी नहीं है दुनिया कि मेहमान नवाजी छूट जाये,
हम भले ही किसी घर में है पर ये नहीं कि फुर्सत अकेले महफ़िलों के बहाने कहीं रिश्तों बागी छूट जाये,
घाव ग़म ज़ख्म दर्द दुःख पीड़ा चोट कष्ट खसोट मुझे नहीं चाहिए ना तुम दो ना किसी बहाने दुआ बद्दुआ में दो,
ना याद दिलाना,
ना इनका नसीब मेरी जिंदगी में छोड़ के जाना,
ना दो इनकी उलाहना,
ना वज़ूद इनका मुझसे जोड़ना,
ना दवा ना मरहम से इनकी याद दिलाना,
तुम्हें मुझे नहीं देना इन सभी को,
मैं अपनी विकास की हर अवस्था में इनको अपने हिसाब से ले लूँगा,
इनकी मात्रा मेरी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार किसी ना किसी रूप में,
क्यूंकि इनके बहाने हम आखिरी लम्हे को भी नहीं छोड़ पाते चाहे आखिरी आखिरी साँसे छूट जाये।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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