हास्य -व्यंग्य
मेकअप बनाम मट्ठा
डॉ.एच सी विपिन कुमार जैन "विख्यात"
शहर की मल्लिका जब गाँव की, पहली रसोई में आई,
अंकीलाल की किस्मत में, जैसे नई शामत छाई।
सासु माँ ने कहा- "बहू! आज मट्ठा तुझे चलाना है,"
दुल्हन बोली- "इसमें मिक्सी का, कौन सा बटन दबाना है?"
मथानी देखकर वो बोली- "ये कैसा अजीब गियर है,"
"क्या इसे चलाने से, मेरा नेल-पेंट भी 'क्लियर' है?"
आंखों में लाइनर लगाकर, वो दही के पास बैठी थी,
पर गर्मी से उसकी मस्कारा, गालों पे ही ऐंठी थी।
जैसे ही मट्ठा उछला, उसके चेहरे का हुलिया बदला,
मेकअप सारा बह गया, जैसे कोई नाला हो पतला।
अंकीलाल देख के चिल्लाया- "अरे! ये कौन खड़ी है?"
बीवी बोली- "चुप रहो! ये 'मड-फेशियल' की कड़ी है।"
घर की बिल्ली भी उसे देख, डर के मारे भाग गई,
सारे गाँव की बूढ़ी काकी, देखने को जाग गई।
सास ने कहा- "बहू! तू तो बिल्कुल चुड़ैल सी लगती है,"
दुल्हन बोली- "मम्मी! ये 'गॉथिक लुक' में सजती है।"
अंकीलाल अब बाल्टी लेकर, मुँह धोने को दौड़ता है,
शहर की फैशन पट्टी से, वो नाता अपना तोड़ता है।
मट्ठा और मेकअप का, ये मेल बड़ा ही भारी था,
अंकीलाल का शहरी सपना, अब पूरी तरह से जारी था।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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