तब ही सच्ची दीपावली हो,
तब ही अच्छी दीपावली हो।
शाश्वत दीप जलें कुछ ऐसे,
अंधकार मिट जाये जैसे,
अपने दिव्य प्रकाश-पुंजों से,
जगमग हो संसार कुछ ऐसे।
हर मन में सद्भाव जगे,
हर हृदय में प्रेम पले,
नफ़रत के तम का अंत हो,
मानवता का नव प्रभात हो।
सारा भारत प्रकाशमान हो,
सबको मानवता का ज्ञान हो,
जाति-धर्म की दीवारें टूटें,
प्रेम के सारे बंधन जुड़ें।
भूखे को भोजन मिल जाए,
निर्धन के घर दीप जल जाए,
हर आँख में खुशियों के सपने हों,
हर चेहरे पर मुस्कान सजे।
दीप जलें तो मन भी चमके,
प्रेम की धारा घर-घर छलके,
मिट जाए मन का अंधियारा,
खुशियों से महके जग सारा।
दीपावली का पर्व तभी,
सार्थक होगा यह उत्सव तभी,
जब हर जीवन खुशहाल हो,
हर मन में प्रेम का उजियारा हो।
तब ही सच्ची दीपावली हो,
तब ही अच्छी दीपावली हो।
-सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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