उसकी मेहरबानियां मानने में वक्त लगता है बहुत
अपनी खामियाँ पहचानने में वक्त लगता है बहुत
अपनी जिद मनवाना बच्चा हरेक हाल में चाहेगा
घर की परेशानियां जानने में वक़्त लगता है बहुत
नब्ज थामकर चारागर नहीं करते हैं अब इलाज
सिर्फ बीमारियां पहचानने में वक्त लगता है बहुत
आदमी की औकात भला क्या कुदरत के सामने
हर किसी को यह मानने में वक्त लगता है बहुत
दास इस पार हम हैं उस पार हमारा है एक भरम
बीच में संसार स्वीकारने में वक्त लगता है बहुत


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







