हम क्या है ये तुम्हें जानना ही होगा,
एक दिन तुम्हें मेरी फितरत को पहचानना ही होगा।
अभी बहुत नफ़रत है तुम्हें हमसे,
पर एक दिन तुम्हें हमसे प्यार करना ही होगा।
तेरे अपने है हम पर तू पराया समझती है,
एक दिन तुम्हें हमे अपना मानना ही होगा।
तुम हमे हमेशा घिन भरी निग़ाहों से देखती हो,
लेकिन एक दिन तुम्हें हमे पछतावे की नज़र से देखना ही होगा।
तुम जलती हो हमसे,क्योंकि बॅंटवारे से डरती हो,
लेकिन एक दिन तुम्हें हमे हमारा हक़ देना ही होगा।
💐 रीना कुमारी प्रजापत 💐
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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