👉बह्र - बहर-ए-मोक़तज़िब मुसम्मन मतवी मकतो
👉 वज़्न - 212 1222 212 1222
👉 अरकान - फ़ाइलात मफ़ऊलुन फ़ाइलात मफ़ऊलुन
छोड़ कर कोई अपना जब भी दूर जाएगा
संग अपने लेकर वो सारा नूर जाएगा
रूह कैद से तन की जब कभी भी निकलेगी
टूट ज़िस्म-ओ-जाँ का तब सब गुरूर जाएगा
सोचते हैं दुनिया में लोग जो ख़ुदा ख़ुद को
उनका वक़्त-ए-मुश्किल में ये फ़ितूर जाएगा
पल में ही उतर जाता ज़ाम का अगर होता
जाते-जाते उल्फ़त का ये सुरूर जाएगा
राह इश्क़ की इंसाँ जो ख़ुशी से आया है
गम से एक दिन हो कर चूर-चूर जाएगा
जिंदगी है अफ़साना मौत इक हक़ीकत है
जो जहाँ में आया है वो जरूर जाएगा
©विवेक'शाद'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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