गंगा झूमे जटा के भीतर,
गंगा झूमे जटा के भीतर,
जटा फैले शिव की समाधि में,
शिव की धूणी में डमरू नाचे,
गंगा झूमे जटा के भीतर,
गंगा झूमे जटा के भीतर,
भक्तों ने भक्ति के फूल खिलाए,
भक्तों ने भक्ति के फूल खिलाए,
हवा में मस्ती भी झूमे गाए,
सत्य में प्रेम की गति बढ़ती जाएँ,
रातों में उजाले शंभू की महफ़िल सजाए,
भूत प्रेत मिल भाईचारा बढ़ाये,
गंगा झूमे जटा के भीतर,
जीवन तो ये समाधि में फूंक गया है,
राख लपेटे झूम गया है,
मौत इसकी याराना सवारी है,
जोगी इसके फनकार है,
ये ही जीवित ओंकार है,
गंगा झूमे जटा की शिव में,
ये रोगियों का उपचारी है,
दान देता ये सत्य क्षमा का,
पवित्र निरंतर सबसे उपकारी है,
स्वीकार स्वयं का है सबसे बड़ा समर्पण,
फ़ना हुआ मैं श्मशान के भीतर,
होते हुए भी वहां नहीं हो रहा हूँ,
गंगा झूमे जटा के भीतर,
जंग करना अभी जारी है,
कर्म होना ये रखा आत्म के भीतर,
भीतर शिव का खोलना अभी बाकी है,
गंगा झूमे जटा के भीतर।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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