इंसान गलत नही गलत संगति पर होता।
नतीजतन आत्मविश्वास थोड़ा कम होता।।
खुद को लोगों की दृष्टि से दिखने लगता।
अंततः खुद के निर्णय से ही परेशान होता।।
अपने अस्तित्व पर सवालिया निशान से।
सकारात्मक भ्रम की वज़ह से खिन्न होता।।
अक्सर खुद पर सवाल उठाकर निहारता।
गलत क्या हुआ सफलता से अनजान होता।।
अनुपयुक्त रिश्ते से खुद को दोषी समझता।
आवाज़ दब जाने पर मेरा मन बेचैन होता।।
हमारा हुनर हमारी सोच हमारा प्यार सही।
गलत साथी से 'उपदेश' गम का भान होता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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