एक सकोरा, एक जीवन
शिवानी जैन एडवोकेट Byss
छत की मुंडेर पर बैठी गौरैया, धीमे से पंख फड़फड़ाती है,
तपती हवा के थपेड़ों से, वो बार-बार घबराती है।
गाय खड़ी है गली के मोड़ पर, सूखी जीभ निकाल कर,
ढूंढ रही है पानी की बूंदें, कूड़े के ढेर को खंगाल कर।
चलो उठाएं एक सकोरा, शीतल जल से उसे भरें,
अपनी छत पर, घर के बाहर, करुणा का एक काम करें।
दो बूंद पानी मिल जाए तो, खिल जाती है इनकी जान,
दुआएं देगा रोम-रोम इनका, तुम बन जाओगे भगवान।
बढ़ता तापमान गवाह है, हमारी इस लापरवाही का,
आओ हाथ बढ़ाएं मिलकर, लें संकल्प भलाई का।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







