एक तरफा इश्क़ बदनाम
>अमूमन दिल ही नादान होता है,
क्यों कहें कि इश्क़ उनके पास होता है, देखने पर लगा था दिल,
अब कहने को लफ्ज़ कहाँ कुर्बान होता है, कहीं गुम ना हो वो चलते चलते,
और जुबां के उलझन में,
इश्क़ एक तरफा बदनाम होता है।
- ललित दाधीच
सरल अर्थ:- हम इश्क़ जरूर करते हैं, क्योंकि पहला इश्क़ हमारी आँखों को होता है, परन्तु हम बयां नहीं कर पाते हैं, जब हम नहीं कह पाते तो फिर हम खुद को तड़पाने लगते हैं, लेकिन अगर हम उन्हें कहें जिनको देखकर हमें इश्क़ हुआ,जिनको सुनकर हमें इश्क़ हुआ, जिनके समीप हमें इश्क़ महसूस हुआ , अगर लफ्ज़ कह दे तो हमारा एक तरफा इश्क़ बदनाम नहीं होता पर नहीं कहता तब दर्द जरूर देता है, उनकी हाँ , ना से ज्यादा जरूरी है हमारा कहना, अगर वो कहें नहीं तो कोई बात नहीं क्योंकि इश्क़ कि पहली शर्त है हिम्मत वो नहीं हो तो हमारा इश्क़ करना बेकार है, जब अपने इश्क़ को बताना, जताना ही नहीं आता तो इश्क़ कहाँ से करना हुआ।
लाखों रचनाएं पढ़ने वाले पाठक अपनी राय, समीक्षा जरूर रखें, नहीं तो हमारी रचनाएं आपके एकतरफा प्यार से बदनाम जरूर हो जाएगी।।


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