तुमसे कोई सामने आकर क्यूं मिलेगा,
तुमसे कोई सामने आकर क्यूं मिलेगा,
कोई सामने आकर क्यूं मिलेगा कोई,
आँखें हैं भरी,
बातें हैं खरी,
दिल का हाल छुपा है घुटन में,
दर्द चुभता है नसों के तल में,
इंसान घबराता है,
उसका मासूमपन छुप जाता है,
गलती से सबके किस्से सुन जाता है,
इज्जत का हार तार तार हो जाता है,
तब सब का होना क्या मतलब है,
तन्हा होना ही तलब है,
यहां से जो तुम्हारी कहानी है,
जोड़ लोगे पता तुम्हारी ज़ुबानी है,
जिंदगी की थकान का ये असर है,
खुद को ही है जीना ये सबक है।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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