त्याग दो कहने वाले समेटने में लगे।
जो समेट नही सके वो लूटने में लगे।।
धर्म अधर्म की परिभाषा गढ़ने वाले।
बेवजह नाराजगी जाहिर करने में लगे।।
आस्था में उम्मीद रखना धर्म समझते।
संसार भी त्याग देंगे पट्टी पढ़ाने में लगे।।
स्वर्ग नर्क कहकर डराते दूसरों को जो।
तरह-तरह के व्याभिचार करने में लगे।।
पाखण्ड जब सिर चढ़कर बोलने लगे।
धन्धा चलता रहे 'उपदेश' देने में लगे।।
कानून की आँच झुलसा न सके उन्हें।
घर में चोरी चोरी नही समझाने में लगे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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