बहना अगर मंजूर नही तो हरगिज पाँव नही धरना।
दरिया रूपी रही मोहब्बत इसमें पड़कर होगा बहना।।
सूरज के उगने से चढ़ने तक गम मिटने का दौर चला।
जैसे ही रुख शाम का लगता हर ओर अँधेरे से बचना।।
लफ्जों को जिंदा कर देती भोली सूरत वाली प्रियतमा।
इश्क मोहब्बत वाली नदियों की तेज रवानी से बचना।।
वैसे तो धरती की मोटी सतह ठण्डी रहती 'उपदेश'।
क्या कुछ फल फूल रहा इस पर फिर भी लावा से बचना।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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