विश्वास की नींद
डॉ.एच सी विपिन कुमार जैन "विख्यात"
जिन्हें चिंता थी कल की, वे रात भर जागते रहे,
अनहोनी के डर से, सायों के पीछे भागते रहे।
क्या होगा, कैसे होगा, इसी सोच में डूबे थे,
भविष्य की उलझनों में, वे खुद ही को ढूँढे थे।
मगर जिन्हें विश्वास था, उस ऊपर वाले हाथ पर,
कि वही सम्भालेगा नाव को, जीवन के हर घाट पर।
वे चादर तानकर सोए, जैसे बच्चा माँ की गोद में,
बिना किसी शिकवे के, बिना किसी अवरोध में।
चिंता करने से कभी, कल नहीं सुधरता है,
विश्वास रखने वाला ही, भवसागर को पार उतरता है।
भरोसा वो चिराग है, जो घोर अंधेरे में जलता है,
उसी के नूर से फिर, किस्मत का पहिया चलता है।
जो उसने लिखा है, वो होकर ही रहेगा,
विश्वास का मीठा फल, तेरे हिस्से में ही बहेगा।
तनाव की इस रात में, तुम चैन की नींद चुनो,
भरोसे के धागों से, तुम सुनहरे सपने बुनो।
चिंता को तुम त्याग दो, विश्वास को आधार बनाओ,
रब की रज़ा में खुद को, तुम पूरी तरह सजाओ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







