फ़िक्र तो उसे होती है जिसे खुदा पर मुकम्मल यकीं नहीं होता
जिसने जन्म दिया है मुझ से जायदा उसे फिक्र है ये यकीं मेरा
ज़रूरत से ज़्यादा चाहत होती है जिसका वह परेशान रहता है
परेशान हम नहीं होते के दूसरे को परेशान करना नहीं सिखा है
सभी से नहीं सीखते हैं सच्चे आदमी की अक्वाल दिल में रखते
सदा एक जैसा किरदार देखा है जिसका उन्हे इंसान मानते हैं
ढाँचा को हम इंसान नहीं मानते जिसमें इंसानियत नहीं आया है
लेखक,शायर की कमी नहीं हर सदी में किसी किसी को माना है
शायर वह हो नहीं सकता जिसका तखलीक अपना नहीं ख्याल रखना
जिनके अल्फाज़ से अवाम जगा नहीं क्यूं के वे ख़ुद जगा हुआ नहीं है
वसी अहमद क़ादरी । वसी अहमद अंसारी
दरवेश । लेखक । पोशीदा शायर


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







