जो हमसे बड़े हैं, वो हमें बताते हैं कि इंसान की चार आंखे हैं।
सब के मन में यही ख्याल आ रहा होगा कौन-कौन से चार आंखें हैं और कैसे हैं...?
1.) दो वास्तविक आंखे
2.) दो आभासी आँखें (मन की आँखें)
दो आंखे जिसमें हम लोगों को देखते हैं,
इस आंखे में हम दुनिया देखते हैं
जिसमें हम पत्थर रूपी भगवान को देखते एवं उन्हें पूजते और जानते हैं कि भगवान ऐसे हैं....।
इसके अतिरिक्त भगवान ने हमें दो और आंखे दी है,
और ये आंखे मन की आँखें हैं,
जिसमें हम भगवान का यथार्थ दर्शन करते हैं।
मन की आँखें इसलिए दी गई है,
क्योंकि जो हमारी वास्तविक आंख हैं उससे हम भगवान को नहीं देख सकते,
लेकिन मन की आंखों से उन्हें देख और उनसे बात कर सकते हैं,
यदि हम वास्तविक आंख से उन्हें देखेंगे,
तो वो हमें कभी दिखाई नहीं देगा,
हमारी आंखों में उतनी सहनशक्ति नहीं है,
जिससे हम उन्हें वास्तविक रूप से देख सके,
लेकिन मन की आंखों से यह संभव है..।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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