चलते चलते रुकना,
कुछ पल रुकना,
फिर चलना,
ये छुपा हुआ नियम है संसार का,
इस नियम से जो चलता है,
वही समय की गति से चल सकता है,
वही अवसर पर कर्म करता है,
सार्थक है बारीक सत्य है,
इस आधार पर हम देखते हैं,
फल मिलता है,
निर्णय होता है,
संसार की गति यही है,
पहली बार ही कुछ रुका,
वहीं से चला चला,
फिर उतनी देर रुकना,
रुकने के बाद गति मिलती है,
सामान्य चलने से अधिक चलते हैं,
तब हम जरूरी कदम दर कदम रखते हैं।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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