कोई औरत अगर अपने कमाए पैसों को
बिना अपनी मर्ज़ी के किसी की मदद में
नहीं लगा सकती,
तो क्या औचित्य उसके आत्मनिर्भर बनने का?
कोई माँगे उससे मदद
और वो कहे कि अपने पति से पूछूंगी,
तो उसके आत्मनिर्भर बनने का कोई
मतलब ही नहीं निकला।
क्या ही हासिल कर लिया उसने
आत्मनिर्भर बनके,
जब खुद की कमाई के लिए भी
किसी की मदद करने से पहले
गर किसी से पड़े पूछना।
हाँ हो सकता है
कि वो खुद ही ना करना चाहती हो
मदद किसी की,
पति तो बस एक बहाना हो,
पर ऐसा करके वो
अपने पति को ही
बना देती है जग बुरा।
💫 रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' 💫
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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