ये आँखों को भी नहीं भाते बाकी आँसू गिराना कौन चाहता है,
ये प्रेम ही तो समझ नहीं आता बाकी इश्क़ करना कौन चाहता है,
ये तड़प तो नहीं देती साथ बाकी सच्चा रिश्ता रखना कौन चाहता है,
ये खुद को गले ही तो नहीं लगाना आता बाकी जीवन भर साथ कौन चाहता है,
ये इंतजार करना ही तो नहीं आता बाकी तुमसे मिलने का बहाना बनाना कौन चाहता है,
ये खुद के साथ रहना ही तो नहीं आता बाकी तुम्हारी गलियों चक्कर लगाना कौन चाहता है,
ये भूलना ही तो नहीं आता तुम्हें बाकी पल भर के लिए बात करना कौन चाहता है,
ये खोना ही तो नहीं चाहता तुम्हें बाकी अपना पता बताना कौन चाहता है,
ये तुम्हारे लिए जीना पसंद करने लगे हैं बाकी आखिरी में आकर मरना कौन चाहता है,
ये तुमसे ही मोहब्बत हुईं हैं बाकी आशिक बनना कौन चाहता है,
ये काबिलियत तुम्हारी है बाकी जग में अस्तित्व रखना कौन चाहता है,
ये तुम पर ही अब निर्भर करता है बाकी अपने ख्याल जताना कौन चाहता है।।
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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