उदयाचल में शनै -शनै
हलचल -सी होने लगी है
अपनी किरण -बाहों से
सूरज भी, अंगड़ाइयां लेने लगा है
पर्वत के उस पार
एक लालिमा,
सुनहरे पन की ओर, बढ़ने लगा है
बालसूर्य, जैसे, दीवार से
गर्दन टांगकर, झांकने लगा है
लंबी रात में,
लंबा विश्राम के पश्चात्
सूरज भी अपनी
दिनचर्या निभाने के लिए
तैयार होने लगा है
तुंग - शिखा पर स्तंभित
ऊंचे विशाल वृक्ष की नोक पर
कुछ, स्खलित किरणांश
मुकुट - मणि की भांति
तनिक धूप- कणिका
बिखेरने लगें हैं,
कलरव -ध्वनि के संग संग
पंछी अपने शिशुओं को
जैसे, कुछ, दिखाने के लिए
आतुर हो रहीं हैं,
पू्रब की ओर देख कर,
हमारी पलकों में बैठी
जिद्दी निंद्रा को
डांट - डांटकर भगाने के लिए
जैसे,छड़ी और झिड़की
दिखा रहा है,लाल सूरज
ये कहते,कि,
उठो अब सुबह हो गई है।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







