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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

        

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Dastan-E-Shayra By Reena Kumari PrajapatDastan-E-Shayra By Reena Kumari Prajapat

कविता की खुँटी

                    

बनारस

तृप्ति बनारस प्यास बनारस
नाथ के दरस की आस बनारस

झूठ जले हू- हू करके जँह
सत्य परम् विश्वास बनारस

विश्वनाथ का दरस हो जाए
बुला लेता गर काश बनारस

मुक्ति सृजित होती है जहाँ
भक्ति आती अनायास बनारस

परम् सौभाग्य चिरंजीवी यह
शिव त्रिशूल पर वास बनारस

बारह मास वसंत विराजे
हर - क्षण है मधुमास बनारस

जन्म- मृत्यु के भ्रमर जाल का
जलाकर करता है नाश बनारस

मोह- माया से मुक्त व्यक्ति का
चिर - परिचित है प्रवास बनारस

प्रभु विश्वनाथ के कृपा पात्रों का
विशुद्ध हृदय का अरदास बनारस

अब बुला भी ले अब देर न कर
मेरा अब न उड़ा उपहास बनारस
-सिद्धार्थ गोरखपुरी




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (6)

+

अशोक कुमार पचौरी 'आर्द्र' said

बनारस की पवित्रता और भक्तिभाव को इस काव्य में जिस शिद्दत से उतारा है, वह मन को छू जाता है। “मुक्ति सृजित होती है जहाँ, भक्ति आती अनायास बनारस” — ये पंक्तियाँ तो आत्मा को सुकून दे देती हैं। सच्चा श्रद्धा और गहरा अनुभव झलकता है हर छंद में। 🙏✨

श्रेयसी said

वाह बहुत सुंदर 🙏🙏

Amit Shrivastav said

अब बुला भी ले अब देर न कर मेरा अब न उड़ा उपहास बनारस - बहुत सुंदर 🙏🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

बारह मास वसंत विराजे,हर क्षण है मधुमास बनारस। विश्वनाथ की नगरी का भावमयी,भक्तिमयी प्रस्तुति करण और दर्शन को तरस रहे भक्त को अपने पास बुलाने का तड़प भरी याचना। क्या खूब लिखा है, सिद्धार्थ जी। वाह।

फ़िज़ा said

बनारस का बहुत सुन्दर चित्रण एवं खूबसूरत रचना

देवांशी पटेल said

बनारस का अपना अलग ही महत्वा है, आपकी रचना ने उसको बखूबी प्रदर्शित किया है बेहतरीन लेखन

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