अपनी अपनी राह
ऐसी ही है ज़िन्दगी की बंदिशें,
अपनी अपनी राह पर ही चलना पड़ता है ।
ज़िन्दगी आसान हो जाती,
अगर उन्में बंदिशें न होती।
इच्छाएँ अनगिनत होती हैं ,
इसलिए राहें आसान हो नहीं पातीं ।
कभी समाज के डर से बदलती है ,
और कभी हमारे अहम् से लड़ नहीं पाती।
ऐसी ही है ज़िन्दगी की कहानी ,
अपनी अपनी सबको लिखनी ही पड़ती है।
-वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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