"वो हो गया जो हो गया,
तुम्हें क्यों चाहत रखनी है"
"क्या हुआ, नहीं आना था,
मुझे भी नहीं आना था,
बस ये इंतज़ार है कि,
ये रास्ता ही आना-जाना छोड़ दें।”
"आप ही ज़रा सोचिए कि दिल को कहाँ रखें,
जहाँ है वहाँ भी तो इसे बचाना ही है,
और हम हैं बचाने वाले,
अब ख़ुद को सौ दरवाज़ों के पास ले जाना ही है।"
"आदमी हूँ, फिर औरत का क्या,
औरत तो इश्क़ है,
नहीं, उसको इश्क़ है,
हाँ, वो तो होगा ही,
नहीं, उसको इश्क़ है,
किससे?
नहीं, उसको इश्क़ है,
फिर आदमी?
आदमी नहीं,
उसको इश्क़ है,
उससे भी पूछो।”
"दुनिया बुरा क्यों न बने,
अच्छा भी तो दिखावे में ही है।”
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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