"अहं मम च सर्वत्र न व्याप्तम्,
नियतिः अन्तर्गतं सूक्ष्मं क्रीडति।
मम विचारे एकः एव अहम्,
स्वतन्त्रः प्राणी जीवने,
अंततः कथा सार्वकालिकी अनवरतं चलति।।"
- ललित दाधीच
व्याख्या:-
"मैं और मेरा (का अहंकार) सब जगह व्याप्त नहीं हो सकता, क्योंकि पर्दे के पीछे नियति (Destiny) अपना एक अत्यंत बारीक और अदृश्य खेल खेलती है। मेरे विचारों में तो केवल एक स्वतंत्र प्राणी का जीवन ही दिखता है, लेकिन अंततः (जन्म, मरण और काल-चक्र की) यह सनातन कहानी हर युग में बिना रुके निरंतर चलती रहती है।"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







